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कुशीनगर मन्दिर
Kushinagar Mandir


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कुशीनगर बौद्ध मन्दिर
Kushinagar Bauddha Mandir






विश्वप्रसिद्ध बौध पर्यटन केन्द्र कुशीनगर भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में स्थित है यह नगर गोरखपुर शहर से 53 कि0 मी0 की दूरी पर है मान्यता है की इसी स्थान पर भगवान बुद्ध ने महा परिनिर्वाण प्राप्त किया था किसी समय यह नगर मल्ल राजाओं की राजधानी था प्राचीन काल मे यह नगर बहुत विकसित था चीनी यात्री, हेनसांग, फाहियान तथा अनेकों इतिहास कारों ने इस नगर के बारे में विस्तार से लिखा है। कुशीनगर प्राचीन समय में 16 महाजनपदों में से एक था कुशीनगर के करीब फाजिल नगर नाम का एक कस्बा है फाजिल नगर को पावापुरी भी कहा जाता हे कुछ इतिहासकारों का मानना है कि जैन धर्म की वास्तविक पावापुरी यही है न कि बिहार में स्थित पावापुरी इसिलिए जैन श्रद्धालुओं ने यहाँ पर एक जैन मन्दिर का निर्माण कराया है। कहते हैं कि फाजिल नगर के “छठियांव” नामक गांव में किसी ने भगवान बुद्ध को सुअर का कच्चा मांस खिला दिया था जिसके कारण उन्हे दस्त की बीमारी शुरु हो गयी जिससे कुशीनगर तक पहुचते ही वे महापरिनिर्वाण को प्राप्त हो गये।

इस प्राचीन एवं ऐतिहासिक स्थान को दुनिया के सामने लाने का श्रेय जनरल ए कनिघंम और ए0 सी0 एल0 कार्लाइल को जाता है जिन्होने 1861 में इस स्थान की खुदाई करवाई थी इसके अतिरिक्त भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग तथा गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास विभाग ने भी यहाँ के अनेकों स्थान पर समय-समय पर खुदाई करवाई है यहाँ पर अनेकों दुर्लभ बहुमूल्य पुरातत्व वस्तुएं प्राप्त हुई है। जिससे इस क्षेत्र के प्राचीन महत्व एवं कला का अंदाजा मिलता है। आज भी यहाँ प्राचीन काल के अनेकों दर्शनीय मठों एवं मन्दिरों को देखा जा सकता है। यहाँ खुदाई में प्राप्त अनेक अनमोंल वस्तुओं एवं सुन्दर मुर्तियों को यहाँ के बौध संग्रहालय में संरक्षित किया गया है।
कुशीनगर का सबसे प्रमुख आर्कषण निर्वाण स्तूप या समाधि स्तूप है इस विशाल स्तूप को 1876 में कार्लाइल ने खोजा था इस स्तूप की ऊचाई 2.47 मीटर है यहाँ पर खुदाई करने पर एक तांबे की नाव भी मिली है जिसमें खुदे अभिलेखों से पता चलता है कि इसमें भगवान बुद्ध की चिता की राख रखी गयी थी महानिर्वाण मन्दिर भी यहाँ का प्रमुख आर्कषण है। इस मन्दिर में महात्मा बुद्ध की 6.10 मीटर लम्बी प्रतिमा स्थापित है यह प्रतिमा 1876 की खुदाई में प्राप्त हुई है। इस सुन्दर प्रतिमा को चुनार के बलुआ पत्थर को काट कर बनाया है।

महापरिनिर्वाण मन्दिर से लगभग 1.5 कि0मी0 की दूरी पर 15 मीटर ऊंचा रामाभर स्तूप है कहते हैं यह स्तूप उसी स्थान पर बना है। जहाँ पर भगवान बुद्ध को 483 ई0पू0 दफनाया गया था। इसके अतिरिक्त शिव मन्दिर, रामजानकी मन्दिर, क्रिएन मन्दिर आधुनिक स्तूप मेडिटेशन पार्क आदि यहाँ के अन्य प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं। कुशीनगर बौधों के लिए एक प्रमुख तीर्थ का दर्जा रखता है इसीलिए पूरे विश्व से हजारों श्रद्वालु अपने प्रभु भगवान बुद्ध के दर्शनों एवं शान्ति की खोज में प्रति वर्ष बड़ी संख्या में यहाँ पर आते हैं।









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