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कार्तिक पूर्णिमा का महत्व

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कार्तिक पूर्णिमा का महत्व

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om कार्तिक पूर्णिमा om
om Kartik Purnima om


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om कार्तिक पूर्णिमा का महत्व om
om Kartik Purnima ka mahatwa om




सृष्टि के प्रारम्भ से ही कार्तिक पूर्णिमा Kartik Purnima की तिथि बड़ी ही खास रही है। पुराणों में कार्तिक पूर्णिमा Kartik Purnima को स्नान,व्रत, तप एवं दान को मोक्ष प्रदान करने वाला बताया गया है। इस माह के महत्व के बारे में स्कन्द पुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण आदि प्राचीन ग्रंथों में विस्तार से बताया गया है,
जानिए कार्तिक पूर्णिमा, Kartik Purnima,कार्तिक पूर्णिमा का महत्व, Kartik Purnima ka mahatwa ।

भगवान श्रीकृष्ण ने इस मास की व्याख्या करते हुए कहा है,‘पौधों में तुलसी , मासों में कार्तिक , दिवसों में एकादशी और तीर्थों में द्वारका मेरे हृदय के सबसे निकट है।’ इसीलिए इस मास में भगवान श्री नारायण के साथ तुलसी और शालीग्राम के पूजन से भी असीम पुण्य प्राप्त होता है ।

Kartik Purnima Ka Mahatwa
इस पवित्र माह में की पूजा, व्रत दान और नित्य सुबह स्नान से असीम पुण्य की प्राप्ति होती है। कार्तिक पूर्णिमा Kartik Purnima में किए स्नान का फल, एक हजार बार किए गंगा स्नान के समान, सौ बार माघ स्नान के समान, वैशाख माह में नर्मदा नदी पर करोड़ बार स्नान के समतुल्य होता है। जो फल कुम्भ में प्रयाग में स्नान करने पर मिलता है, वही फल कार्तिक माह की पूर्णिमा kartik maah ki Purnima में किसी भी पवित्र नदी के तट पर स्नान करने से प्राप्त होता है।

कार्तिक मास की पूर्णिमा का बहुत ही ज्यादा महत्व है। कार्तिक मास की पूर्णिमा को कार्तिक पूर्णिमा / त्रिपुरी पूर्णिमा या गंगा स्नान के नाम से भी जाना जाता है। क्योंकि आज के दिन ही भगवान भोलेनाथ ने त्रिपुरासुर नामक महाभयानक असुर का अंत किया था और वे त्रिपुरारी के रूप में पूजित हुए थे, इसीलिए इस पुर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।
ऐसी माना जाता है कि इस दिन कृतिका में शिव शंकर के दर्शन करने से मनुष्य अगले सात जन्म तक ज्ञानी, धनवान और भाग्यशाली होता है।



Kartik purnima





om इस दिन चन्द्र जब आकाश में उदित हो रहा हो उस समय शिवा, संभूति, संतति, प्रीति, अनुसूया और क्षमा इन छ: कृतिकाओं के नाम का उच्चारण करते हुए इनका पूर्ण श्रद्धा से पूजन करने से जातक को भगवान शिव जी की अनुकम्पा प्राप्त होती है।



om इन 6 कृतिकाओं ने ही भगवान शिव और माँ पारवती के पुत्र भगवान कार्तिकेय को जन्म दिया था और उनका पालन पोषण किया था। शास्त्रों के अनुसार कार्तिकेय का जन्म 6 अप्सराओं के 6 अलग-अलग गर्भों से हुआ था और फिर वे 6 अलग-अलग शरीर एक में ही मिल गए थे।
शास्त्रों में कई जगह इन 6 कृतिकाओं को 6 सप्तऋषियों की पत्नियों के रूप में माना गया है। इन्हे भगवान कार्तिकेय के आदेशानुसार ही नक्षत्रमण्डल में स्थान प्राप्त हुआ है ( महाभारत वनपर्व के मार्कण्डेयसमास्यापर्व के अंतर्गत अध्याय 230 में वर्णित। )

om कार्तिक पूर्णिमा के दिन इन कृतिकाओं का नाम लेकर स्मरण करने से पूरे वर्ष घर परिवार में प्रेम और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

om शास्त्रो में कार्तिक पूर्णिमा को बहुत मान्यता है इस पूर्णिमा को महाकार्तिकी भी कहते है।

om यदि इस पूर्णिमा Purnima के दिन भरणी नक्षत्र हो तो इसका महत्व बहुत अधिक बढ़ जाता है।

om अगर कार्तिक पूर्णिमा Kartik Purnima के दिन रोहिणी नक्षत्र है तो इस पूर्णिमा का महत्व अत्यधिक बढ़ जाता है, यह अति शुभ मानी जाती है।

om और अगर इस दिन कृतिका नक्षत्र पर चन्द्रमा और बृहस्पति हों तो यह पूर्णिमा महापूर्णिमा कहलाती है।

om और अगर इस दिन कृतिका नक्षत्र पर चन्द्रमा और विशाखा पर सूर्य हो तो पद्मक योग का निर्माण होता है जिसमें गंगा स्नान करने से पुष्कर स्नान से भी अधिक श्रेष्ठ फल की प्राप्ति होती है।


om इस दिन गंगा / पवित्र नदी में स्नान करने से भी पूरे वर्ष स्नान करने का फल मिलता है।

om पुराणों के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु ने प्रलय काल में धर्म, वेदों की रक्षा के लिए तथा सृष्टि की रक्षा के लिए मत्स्य अवतार धारण किया था।
इसके अतिरिक्त आषाढ़ शुक्ल एकादशी से भगवान विष्णु चार मास के लिए योगनिद्रा में लीन होकर कार्तिक शुक्ल एकादशी को पुन: उठते हैं और पूर्णिमा से कार्यरत हो जाते हैं।

om कार्तिक माह की देवोत्थान एकादशी के दिन लक्ष्मी की अंशरूपा तुलसी जी का का विवाह विष्णु स्वरूप शालिग्राम से होता है और कार्तिक पूर्णिमा के दिन तुलसी जी की विदाई होती है । इन्ही सब खुशियों के कारण देवता स्वर्गलोक में दिवाली मनाते हैं इसीलिए इसे देव दिवाली कहा जाता है।

om कार्तिक पूर्णिमा Kartik Purnima के दिन गंगा स्नान, दीपदान, हवन, यज्ञ, अपनी समर्थानुसार पूर्ण श्रद्धा के साथ दान और गरीबों को भोजन आदि करने से सभी सांसारिक पापों से छुटकारा मिलता है| इस दिन किये जाने वाले अन्न, धन और वस्त्र दान का भी बहुत ही ज्यादा महत्व बताया गया है।
कहते है कि इस दिन जो भी दान किया जाता हैं हमें उसका अनंत गुना लाभ मिलता है। यह भी मान्यता है कि इस दिन व्यक्ति जो कुछ भी दान करता है वह उसके लिए स्वर्ग में संरक्षित रहता है जो मृत्यु के बाद स्वर्ग में उसे पुनःप्राप्त होता है।

om इस दिन क्षीरसागर दान का अनंत माहात्म्य है, इस दान से भगवान श्री हरि अत्यंत प्रसन्न होते है । क्षीरसागर का दान 24 अंगुल के बर्तन में दूध भरकर उसमें सोने या चाँदी की मछली डालकर किया जाता है।

om कार्तिक पूर्णिमा के दिन स्नान के बाद भगवान श्री सत्यनारायण के व्रत की कथा अवश्य ही सुननी चाहिए। कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान श्री हरि की गंध, अक्षत, पीले लाल पुष्प, नारियल, पान, सुपारी, कलावा, तुलसी, आंवला, दूर्वा, शमी पत्र,पीपल के पत्तों एवं गंगाजल से पूजन करने से व्यक्ति को जीवन में किसी भी वस्तु का अभाव नहीं रहता है। वह इस लोक में समस्त सांसारिक सुखों को भोगते हुए अंत में स्वर्ग को प्राप्त होता है।

om इस दिन सायंकाल घरों, मंदिरों, पीपल के वृक्षों तथा तुलसी के पौधों के पास दीपक जलाए जाते हैं और गंगाजी / नदियों को भी दीपदान किया जाता है।


om कार्तिक पूर्णिमा के दिन प्रत्येक मनुष्य को दीपदान अनिवार्य रूप से करना चाहिए। स्कन्द पुराण में ब्रह्मा जी ने नारद जी को कार्तिक मास में दीपदान की महिमा के बारे में विस्तार से बताया है। उनके अनुसार कार्तिक माह में दीपदान से राजसुय यज्ञ और अश्वमेघ यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है। उसमें भी कार्तिक पूर्णिमा के दिन दीपदान करने का पुण्य जन्म जन्मांतर तक अक्षय रहता है। पूरे वंश में किसी को भी नरक का मुँह नहीं देखना पड़ता है।


om इस दिन संध्याकाल में जो लोग अपने घरों को दीपक जला कर सजाते है उनका जीवन सदैव आलोकित प्रकाश से प्रकाशित होता है उन्हें अतुल लक्ष्मी, रूप, सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है, माँ लक्ष्मी ऐसे लोगो के घरों में स्थाई रूप से सदैव निवास करती है ।
इसीलिए इस दिन हर जातक को अपने घर के आँगन, मंदिर, तुलसी, नल के पास, छतों और चारदीवारी पर दीपक अवश्य ही जलाना चाहिए।

om कार्तिक पूर्णिमा का दिन सिक्ख सम्प्रदाय में प्रकाशोत्सव के रूप में मनाया जाता है, क्योंकि इस दिन सिक्ख सम्प्रदाय के संस्थापक गुरू नानक देवजी का जन्म हुआ था इसलिए इसे गुरु पर्व भी कहा जाता है।
इस दिन सिक्ख श्रद्धालु गुरूद्वारों में जाकर शबद - कीर्तन - गुरूवाणी सुनते हैं और गुरु नानक देवजी के सिखाये मार्ग पर चलने का संकल्प लेते है। इस दिन सिक्ख सम्प्रदाय के लोग अपने घरो और गुरुद्वारों को खूब रौशनी करके जगमगाते है ।



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डा० उमाशंकर मिश्र ( आचार्य जी )

ज्योतिष, रत्न, यन्त्र एवं वास्तु विशेषज्ञ


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1.
hello thx for tips
lalit`  

2.
धन सबकी किस्मत में है। सबके लिये विष्णु-लक्ष्मी जी, संपत्ति से भरी तिजोरी भेजते हैं। बस उस तिजोरी की चाबी उनके पास होती है। धनी बनने के लिए इसी तिजोरी की चाबी को खोजना है। चाबी कैसे मिलेगी यह बड़ा सवाल है। तो इसके लिए करने होंगे लक्ष्मी जी के उपाय। वैसे भी महालक्ष्मी व्रत 29 August से शुरू होंगे। लक्ष्मी जी आपके घर में, उत्तर दिशा से आयेंगी। तो धन संपत्ति पाने के लिये, लक्ष्मी जी को उत्तर दिशा से पुकारें। 15 दिन लक्ष्मी की आराधना से जन्म-जन्म की कंगाली दूर होगी। my email is [email protected]

If you want to do MAHALAXMI VRAT then email me. Mahalaxmi vrat 16 days every year fast for 16 years fast will be observed and you will get everything which you really deserved then no need to depend on any other Vrat or Upvas, just contact me for full Mahalaxmi Vrat details in brief. Mahalaxmi Vrat will start from August 29, 2017 Tuesday to September 12, 2017 Tuesday till midnight (total 15 days). my email is [email protected]
Amit Shah  

3.
Sachin shivasharma Patil   

4.
Sachin shivasharma Patil   

5.
कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा(KartikTripuri Poornima) के नाम से भी जाना जाता है. इस पुर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा की संज्ञा इसलिए दी गई है क्योंकि कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही भगवान भोलेनाथ ने त्रिपुरासुर नामक महाभयानक असुर का अंत किया था और वे त्रिपुरारी के रूप में पूजित हुए थे. ऐसी मान्यता है कि इस दिन कृतिका नक्षत्र में शिव शंकर के दर्शन करने से सात जन्म तक व्यक्ति ज्ञानी और धनवान होता है. इस दिन चन्द्र जब आकाश में उदित हो रहा हो उस समय शिवा, संभूति, संतति, प्रीति, अनुसूया और क्षमा इन छ: कृतिकाओं का पूजन करने से शिव जी की प्रसन्नता प्राप्त होती है. और जानने के लिए यहां क्लिक करें- https://rgyan.com/hindiblogs/kartik-poornima-vrat-katha/
Nancy   


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