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जन्माष्टमी कब है

जन्माष्टमी

जन्माष्टमी
Janmashtmi


जन्माष्टमी

जन्माष्टमी कब है
Janmashtmi kab hai


kalash हिन्दु धर्म में जन्माष्टमी का पर्व बहुत श्रद्धा और उल्लास के साथ ना केवल भारत में वरन विश्व के कोने कोने में मनाया जाता है। इस दिन मंदिरो को विशेष रूप से सजाया जाता है , मंदिरो में और बहुत से लोग अपने घरो में भी भगवान श्री कृष्ण के जीवन से सम्बन्धित झाँकिया सजाते है। इस दिन सभी उम्र के लोग 'राधे कृष्णा', 'हाथी घोडा पालकी जय कन्हया लाल की' आदि का उद्घोष करते दिखाई देते है।

kalash शास्त्रों के अनुसार भगवान श्री कृष्ण का अवतरण धरती को पापियों से मुक्त कराने भाद्रपद कृष्ण अष्टमी बुधवार को रात्रि 12 बजे मथुरा नगरी के कारागार में वासुदेव जी की पत्नी देवकी के गर्भ से रोहिणी नक्षत्र में एवं वृषभ के चंद्रमा की स्थिति में हुआ था। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भगवान श्री कृष्ण लगभग 5 हजार 243 वर्ष पूर्व मध्य रात्रि में इस धरती पर अवतरित हुए थे अर्थात इस वर्ष श्रीकृष्ण जी का 5244 वां जन्मोत्सव मनाया जाएगा।

kalash भगवान श्री कृष्ण का अपने 8 वे अवतार के रूप में , 8 वें मनु वैवस्त के मन्वन्तर के 28 वें द्वापर में भाद्रपक्ष की कृष्ण पक्ष की रात्रि के 7 पहर बीत जाने के बाद 8 वे पहर के शुभ लग्न में जब सभी ग्रहों की शुभ दृष्टि पड़ रही थी रोहणी नक्षत्र एवं अष्टमी तिथि के संयोग से जयंती योग में अवतरण हुआ था।

kalash लेकिन इस बार 2017 में बुधवार नहीं है, तिथि और नक्षत्र का मिलन भी नहीं हो पा रहा है इसलिए 2017 में जन्माष्टमी के पर्व को किस दिन मनाएं इसको लेकर जनता में भ्रम की स्तिथि बनी हुई है।

kalash हालाँकि बहुत से आचार्यो का तर्क है कि रोहिणी नक्षत्र 15 की रात को प्राप्त हो रही है इसलिए 15 कि रात को जन्मोत्सव मनाना चाहिए किन्तु शास्त्र सम्मत 14 की रात में अष्टमी तिथि है इस कारण 14 को भी कृष्णजन्मोत्सव मनाना उचित रहेगा।

kalash ब्रह्मपुराण के अनुसार कलियुग में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी में अट्ठाइसवें युग में देवकी के पुत्र श्रीकृष्ण उत्पन्न हुए थे।
"दिवा वा यदि रात्रौ नास्ति चन्द्रोहिणी कला ,रात्रियुक्ता प्रकुरवीत विशेषेंन्दुसयुंता",
(अर्थात्--यदि दिन या रात में कलामात्र भी रोहिणी न हो तो विशेषकर चंद्रमा से मिली हुई रात्रि में इस व्रत को करें।)

kalash इस वर्ष चूँकि अष्टमी तिथि रोहिणी नक्षत्र को दिन या रात में नही स्पर्श कर रही अर्थात रोहिणी और अष्टमी का योग ही नही हो रहा है तथा 14 की रात्रि में अष्टमी तिथि चन्द्रमा से मिलेगी अतएव इसी रात कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जायेगा ।

kalash भारत में जन्माष्टमी को स्मार्त और वैष्णव सम्प्रदाय के लोग अलग-अलग तरीके से मनाते हैं। श्रीमद्भागवत को प्रमाण मानकर स्मार्त सम्प्रदाय को मानने वाले चंद्रोदय व्यापिनी अष्टमी एवं रोहिणी नक्षत्र में जन्माष्टमी मनाते है। वहीँ दूसरी ओर वैष्णव सम्प्रदाय उदयकाल अष्टमी एवं उदयकाल रोहिणी नक्षत्र को जन्माष्टमी का त्योहार मनाता है।
गृहस्थ लोग स्मार्त संप्रदाय के होते है अत: स्मार्त लोगों को 14 अगस्त को जन्माष्टमी मनानी चाहिए जबकि वैष्णव सम्प्रदाय के लोगों को 15 अगस्त को व्रत रखना चाहिए। भविष्य पुराण, विष्णु पुराण, अग्नि एवं श्रीमद्भागवत पुराण आदि में इसका वर्णन मिलता है।

kalash विष्णु धर्म के अनुसार आधी रात के समय रोहिणी में जब कृष्णाष्टमी हो तो उसमें कृष्ण का अर्चन और पूजन करने से तीन जन्मों के पापों का नाश होता है।

kalash महर्षि भृगु ने कहा है- जन्माष्टमी, रोहिणी और शिवरात्रि ये पूर्वविद्धा ही करनी चाहिए तथा तिथि एवं नक्षत्र के अन्त में पारणा करें। इसमें केवल रोहिणी उपवास भी सिद्ध है।।

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