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हनुमान जयंती


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om हनुमान जयंती / Hanuman Jayanti om


हनुमान जयंती Hanuman Jyanti हिन्दुओं का प्रमुख पर्व है जो चैत्र माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन पवन पुत्र हनुमानजी का जन्म माना जाता है। माना जाता है की सुबह 4 बजे उन्होंने वानरराज केसरी और देवी अंजना के यहां माँ अंजना के कोख से जन्म लिया था । वे भगवान् शिव के 11 वें अवतार थे।

om वर्ष 2018 में हनुमान जयन्ती 31 March ( 31 मार्च ) को शनिवार के दिन को मनाई जाएगी। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि हनुमान जी की पूजा के लिए मंगलवार आैर शनिवार का दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। हनुमान जी की रामभक्ति समूचे विश्च में विख्यात है। हनुमान जयंती 30 मार्च को शाम 07:35 से 31 मार्च को शाम 6 बजे तक है।
31 मार्च को उदया तिथि होने के कारण 31 मार्च शनिवार को ही यह पर्व मनाया जाएगा। इसलिए साम 6 बजे तक पूजा किया जाना शुभ रहेगा।

om शास्त्रानुसार समुद्रमंथन के पश्चात भगवान शिव जी ने भगवान विष्णु का मोहिनी रूप देखने की इच्छा प्रकट की, जो उन्होनें समुद्र मंथन में देवताओँ और असुरोँ को दिखाया था। भगवान शिव विष्णु जी का उनका वह आकर्षक रूप देखकर काम के वश में उन्होंने अपना वीर्यपात कर दिया। उसी समय वायुदेव ने भगवान शिव जी के बीज को वानर राजा केसरी की पत्नी अंजना के गर्भ में प्रविष्ट कर दिया। और इस तरह अंजना के गर्भ से वानर रूप हनुमान का जन्म हुआ।

om एक मान्यता के अनुसार इंद्र के राज्य में विराजमान वायुदेव ने ही माता अंजनी के गर्भ में हनुमानजी को भेजा था, इस कारण उन्हें वायुपुत्र एवं पवनपुत्र भी कहा जाता है।
कर्इ हिन्दू पंचांगों में हनुमानजी का जन्म आश्विन माह की चतुर्दशी की आधी रात में होना बताया गया है, जबकि कर्इ जगह कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी को। लेकिन दोनों में हनुमानजी के प्रति श्रद्घा आैर विश्वास एक समान होता है।

Kalash Fourth Image ब्रह्मांडपुराण में हनुमान जी के पिता वानर राज केसरी और हनुमान जी के भाइयों के बारे में बताया गया है। इसमें हनुमान जी के पिता केसरी जी के कुल 6 पुत्र बताए गए हैं और सभी में बजरंगबली को सबसे बड़ा बताया गया है।

Kalash Fourth Image हनुमान जी के पांच भाइयों के नाम इस तरह हैं - मतिमान, श्रुतिमान, केतुमान, गतिमान और धृतिमान। इस ग्रंथ में इन सभी की संतानों का उल्‍लेख भी में क‍िया गया है।

Kalash Fourth Image कई शास्त्रों में महाभारत काल में पांडु पुत्र बलशाली भीम को भी हनुमान जी का ही भाई बताया गया है। चूँकि हनुमानजी पवन पुत्र है। और कुंती ने भी पवनदेव के माध्यम से ही भीम को जन्म दिया था। इसीलिए भीम हनुमान जी भाई माने जाते है।
ब्रह्मांडपुराण में हनुमान जी के पुत्र का वर्णन भी है जिसका नाम मकरध्वज बताया गया है।

Kalash Fourth Image बजरंग बलि को हनुमान नाम अपनी ठोड़ी के आकार के कारण मिला । संस्कृत में हनुमान का मतलब होता है बिगड़ी हुई ठोड़ी। इसी लिए पवनपुत्र हनुमान भी कहलायें जाते है।

Kalash Fourth Image राम भक्त हनुमान दुर्गा माँ के सेवक भी माने गए हैं। हनुमानजी माँ दुर्गा के आगे-आगे चलते हैं और भैरवजी उनके पीछे-पीछे। इसीलिए माँ दुर्गा के देश में जितने भी मंदिर है वहां उनके आसपास हनुमानजी और भैरवजी का मंदिर जरूर होते हैं।

Kalash Fourth Image वैसे तो हनुमान जी ने सूर्यदेव और नारदजी के अलावा बहुत से लोगो से शिक्षा ली थी लेकिन हनुमानजी मातंग ऋषि के शिष्य माने जाते थे। शास्त्रों के अनुसार मातंग ऋषि के आश्रम में ही हनुमानजी का जन्म हुआ था। ऐसी मान्यता है श्रीलंका के जंगलों में मंतग ऋषि के वंशज आदिववासी से हनुमान जी प्रत्येक 41 साल बाद मिलने आते है।



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डा० उमाशंकर मिश्र ( आचार्य जी )
ज्योतिष, रत्न, यन्त्र, कुंडली एवं वास्तु विशेषय


Published By : Memory Museum
Updated On : 2018-03-29 6:23:55 PM


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