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गुरु पूर्णिमा का महत्व

Guru Purnima Ka Mahatva

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om गुरु पूर्णिमा का महत्व om


omGuru Purnima Ka Mahatva om


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om गुरु पूर्णिमा om


om Guru Purnima om


आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) कहते हैं। इस दिन अपने गुरु की पूजा का विधान है। यह दिन महाभारत के रचयिता कृष्ण द्वैपायन व्यास का जन्मदिन भी है। वे संस्कृत के प्रकांड विद्वान थे और उन्होंने चारों वेदों की रचना की थी। इस कारण उनका वेद व्यास भी कहा जाता है। वह आदिगुरु कहलाते है और उनके सम्मान में गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) को व्यास पूर्णिमा (Vyas Purnima) नाम से भी जाना जाता है।

गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) से चार महीने तक ऋषि-मुनि एक ही स्थान पर रहकर ज्ञान की गंगा बहाते हैं, इस समय मौसम भी अनुकूल होता है अत: उनके अनुयायी उनके शिष्य, भक्त जन अपने गुरु के चरणों में उपस्थित रहकर ज्ञान, भक्ति, शान्ति, योग एवं अपने कर्तव्यों के पालन आदि की शिक्षा प्राप्त करते है, उनके सत्संग का लाभ उठाते है ।

हिन्दु धर्म शास्त्रों में गुरू को अंधकार को दूर करके ज्ञान का प्रकाश देने वाला कहा गया है। शास्त्रों के अनुसार गुरु की कृपा से ही धर्म, ज्ञान, सांसारिक कर्तव्यों का पालन एवं ईश्वर की भक्ति संभव है ।

"गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागूं पाय। बलिहारी गुरु आपके जिन गोविंद दियो बताय"॥
इस श्लोक में गुरु को ईश्वर से भी अधिक महत्व दिया गया है क्योंकि वह ही हमें अज्ञान रूप अंधकार से ज्ञान रूपी प्रकाश की ओर लेकर जाता है और उसी के दिखाए हुए मार्ग पर चलकर ही ईश्वर की प्राप्ति होती है ।

गुरु अपने शिष्य को नया जन्म देता है, गुरु अपने शिष्य की ना केवल समस्त जिज्ञासाएं ही शान्त करता है वरन वह उसको जीवन के सभी संकटो से बाहर निकलने का मार्ग भी बतलाता है । गुरु ही शिष्य को सफलता के लिए उचित मार्गदर्शन करता है , अपने शिष्य को नयी ऊँचाइयों पर ले जाता है।

शास्त्रों के अनुसार जीवन में ज्ञान, प्रभु भक्ति, सुख-शान्ति और देव ऋण, ऋषि ऋण एवं पितृ ऋण से मुक्ति पाने के लिए, अपने समस्त कर्तव्यों का निर्वाह करने के लिए सच्चे गुरु की नितान्त आवश्यकता होती है। वास्तव में जिस भी व्यक्ति से हम से कुछ भी सीखते हैं , वह हमारा गुरु होता है और हमें उसका अवश्य ही सम्मान करना चाहिए।

वैसे तो हमें सदैव ही अपने गुरु का पूर्ण आदर एवं सम्मान करना चाहिए लेकिन शास्त्रों में आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा 'गुरु पूर्णिमा' (Guru Purnima) को गुरु सम्मान करना अत्यन्त पुण्यदायक माना है । प्राचीन काल से ही इस दिन लोग अपने गुरु का सम्मान करते हैं । इस दिन गुरु को गुरु दक्षिणा देने की भी परंपरा है।

गुरु पूर्णिमा के दिन भक्तो की आस्था सैलाब उमड़ पड़ता है । लोग अपने गुरु को पुष्प भेंट करते है उनका माल्यापर्ण करते हैं उन्हें अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य से फल, मिष्ठान, वस्त्र , और उपहार आदि अर्पित करके उनका पूजन करते है उनका आशीर्वाद , उनकी कृपादृष्टि प्राप्त करते है । गुरु पूर्णिमा के दिन अपने माता -पिता, बड़े भाई-बहन आदि की भी अवश्य ही पूजा करनी चाहिए।

गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) के दिन समस्त मनुष्यों को अपने गुरु का आशीर्वाद अनिवार्य रूप से लेना चहिये। गुरु का आशीर्वाद सभी विद्यार्थी , समस्त छोटे-बड़े के लिए अत्यन्त ज्ञानवर्द्धक, कल्याणकारी और समस्त संकटो से रक्षा करने वाला होता है।

गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) के दिन हमें 'गुरुपरंपरासिद्धयर्थं व्यासपूजां करिष्ये' मंत्र से पूजा की माला का अवश्य ही जाप करना चाहिए । इस दिन हमें व्यासजी, ब्रह्माजी, गुरु बृहस्पति, गुरु शुक्राचार्य, गोविंद स्वामीजी और आदि गुरु शंकराचार्यजी के नाम का अवश्य ही स्मरण , ध्यान करना चाहिए, उनसे अपनी जाने अनजाने में की गयी गलतियों के लिए माँगनी चाहिए।

इस दिन सप्त ऋषियों ऋषि वशिष्ठ,ऋषि कश्यप, ऋषि अत्रि, ऋषि जमदग्नि, ऋषि गौतम, ऋषि विश्वामित्र और ऋषि भारद्वाज का स्मरण भी अवश्य ही करें ।




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Guru Purnima Ka Mahatva

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