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द्वारिका
Dwarka


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द्वारिका धाम
Dwarka Dham






द्वारिका हिन्दुओं का प्रमुख तीर्थ स्थान है। द्वारिका भारत के पश्चिम में समुद के किनारे सौराष्ट्र प्रान्त में बसी है। यह चारों धामों में एक है। आज से हजारों वर्ष पूर्व भगवान श्री कृष्ण ने इसे बसाया था। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ, गोकुल में वह पले बड़े परन्तु शासन उन्होंने द्वारिका में ही किया, पहले मथुरा ही श्रीकृष्ण की राजधानी थी परन्तु कालान्तर में उन्होंने मथुरा को छोड़कर द्वारिका को अपनी राजधानी बनाया। यही से उन्होंने सारे देश की बागडोर संभाली, धर्म की रक्षा की, अधर्म का नाश किया, पापियों को दंडित किया।

द्वारिका एक छोटा कस्बा है, कस्बे के एक हिस्से में चहारदीवारी के अन्दर बड़े बड़े दिव्य मंदिर है। द्वारिका की सुन्दरता अद्वितीय है। द्वारिका के बारे में कहा जाता है कि इस नगर की स्थापना स्वयं विश्वकर्मा देव ने अपने हाथों से की थी तथा उन्ही के कहने पर श्रीकृष्ण जी ने तप करके समुद्रदेव से भूमि के लिये प्रार्थना की थी तथा प्रसन्न होकर समुद्रदेव ने उन्हें बीस योजन भूमि प्रदान की थी। यहाँ भगवान श्रीकृष्ण का द्वारिकाधीश मंदिर सुन्दरता एवं वास्तुकला का अदभुत उदाहरण है। चूँकि भगवान श्रीकृष्ण को सम्पूर्ण जगत का स्वामी माना गया है इसलिये द्वारिकाधीश मंदिर को जगत मंदिर भी कहते है।

यह मंदिर लगभग 2500 वर्ष पुराना है तथा इसके गर्भगृह में भगवान द्वारिकाधीश की स्थापना है। यहाँ उनका काले रंग का विगृह चर्तुभुज विष्णु का रूप है। इस भव्य मंदिर का भवन पाँच मंजिला है तथा यह भवन 72 खम्बों पर टिका है, यह मंदिर लगभग 80 किट ऊँचा है। गुम्बद पर सूर्य एवं चन्द्रमा के चित्र अंकित लम्बी पताका लहराती रहती है। यह अति सुन्दर मंदिर आशचर्यजनक रूप से गोमती नदी एवं अरब सागर के संगम स्थल पर स्थित है।

इस मंदिर में एक बहुत ऊँचा शानदार दुर्ग और श्रद्धालुओं के लिये एक विशाल भवन भी बना है। मंदिर में दो खूबसूरत प्रवेशद्वार बने है। इसके मुख्य द्वार को मोक्ष द्वार तथा दक्षिणी द्वार को स्वर्ग द्वार कहते है।

यहाँ से मात्र 12 कि0मी0 की दूरी पर नागेश्वर महादेव जी का मंदिर है जो भगवान शिव के 12 ज्योतिलिंगों में एक माना जाता है। इसके अतिरिक्त गोपि तालाब, रूकमणि मंदिर, निश्पाप कुण्ड, रणछोड़ जी मंदिर दुर्वासा और त्रिविक्रम मंदिर, कशेश्रर मंदिर, शरदा मठ, चक्र तीर्थ, भेट द्वारिका, कैलाश कुण्ड, शेख तालाब आदि अति पर्वित्र एवं दर्शनीय स्थल है।


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