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श्री दुर्गा वीसा यन्त्र


                  Durga Beesa yantra Hindi

श्री दुर्गा वीसा मन्त्र


दुर्गा वैदिक मन्त्र --





दुर्गा बीज मन्त्र --


दुर्गा गायत्री मन्त्र --


ॐ दुर्गति हरिणी दुर्गा जय जय
काल विनाशिनी काली जय जय
उमा राम ब्रहाणी जय जय
राधा सीता रुक्मिणी जय जय ।।


ॐ दुं दुर्गायै नामः


ॐ दुर्गा देव्यै च विद्महे शिव पत्न्यै ।
च धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात् ।।



इस ब्रह्माण्ड की शक्ति का केंद्रीय रूप मां दुर्गा का ही हैं। इनका अवतरण ब्रह्मा, विष्णु, महेश एवं अन्य देवताओं के तेज से हुआ है ।यह माँ दुर्गा सृष्टि का निर्विकार निर्विकल्प सत्य है ।माँ दुर्गा के भक्तों को सभी कुछ सहज है उनके लिए कुछ भी दुर्लभ नहीं रह जाता है ।माँ की महिमा अपरम्पार है , माँ सदैव अपने सच्चे भक्तों की सभी मनोकामनाओं को निश्चित रूप से पूर्ण करती है मार्कण्डेय पुराण के अंतर्गत 700 श्लोकों की श्री दुर्गासप्तशती में मां की विविध कथाओं का चित्रण किया गया है। महर्षि मार्कण्डेय के अनुरोध पर ब्रह्मा जी ने माँ दुर्गा की यह समस्त कथा कही है । श्री दुर्गासप्तशती का पाठ करने वाले भक्तों का इस ब्रह्माण्ड में कोई भी बाल भी बांका नहीं कर सकता है , श्री दुर्गासप्तशती के समस्त मंत्र अगाध शक्तियों से पूर्ण हैं। सिद्ध श्री दुर्गा बीसा यंत्र माँ के भक्तों के लिए अति विशेष एवं उपयोगी यंत्र है द्य दुर्गा बीसा यंत्र को प्रतिदिन पूर्ण श्रद्धा से नमस्कार करके माँ से अपने सौभाग्य की प्रार्थना करने से भक्तों पर माँ की सदैव विशेष अनुकम्पा बनी रहती है द्य उन्हें जीवन में हर क्षेत्र में सफलता, ज्ञान, अनंत वैभव, यश और कीर्ति की प्राप्ति होती है । माँ के भक्तों को किसी भी प्रकार के रोग एवं व्याधियों का सामना नहीं करना पड़ता है उनके परिवार में हमेशा मंगलमयी, प्रेम और उल्लास का वातावरण बना रहता है द्य माँ के भक्त इस संसार के समस्त सुख और वैभवों को भोग करते हुए लम्बी आयु प्राप्त करते है और अंत में स्वर्ग को प्राप्त होते है ।

।। दुर्गा द्वात्रिंशन्नाममाला ।।

यदि कोई व्यक्ति कभी किसी घोर संकट में फंस गया हो उसको सभी मदद के दरवाजे बंद नजर आ रहे हो अगर उसकी खुद की परछाई भी उसका साथ ना दे पा रही हो ऐसे सर्वथा विपरीत परिस्तिथि में भी अगर वह माँ भगवती के शरण में चला जाये और यह उनकी दुर्गा द्वात्रिंशन्नाममाला अर्थात माँ दुर्गा के ३२ नमो का जप कर ले तो उसकी निश्चित ही सभी शत्रुओ से रक्षा हो जाती है । इस उपाय के बारे में स्वयं माँ दुर्गा ने कहा है की ’’जो मानव नित्य मेरे इन नामों का उच्चारण करेगा वह हर शत्रु हर प्रकार के भय से हमेशा मुक्त रहेगा। ’’

माँ दूर्गा के ३२ नाम

दूर्गा , दुर्गातिश्मनी , दुर्गापद्धिनिवारिणी , दुर्गमच्छेदिनी , दुर्गसाधिनी , दुर्गनाशिनी , दुर्गतोद्वारिणी , दुर्गनिहन्त्री , दुर्गमापहा , दुर्गमज्ञानदा, दुर्गदैत्यलोकदाव्नला ,, दुर्गमा ,दुर्गमालोका , दुर्ग्मात्मस्वरुपिणी , दुर्गमार्गप्रदा , दुर्गमविद्या , दुर्गमाश्रिता , दुर्गमज्ञानसंस्थाना , दुर्गमध्यांन्भासिनी, दुर्गमोहा , दुर्गमगा ,दुर्गमार्थस्वरुपिणी , दुर्गमासुरसंहत्री, दुर्गामयुध्धारिणी ,दुर्गमांगी ,दुर्गमता ,दुर्गम्या, दुर्गमेश्वरी , दुर्गभीमा , दुर्गभामा , दुर्गभा , दुर्गदारिणी , नामावलिमिमां यस्तु दुर्गाया मम मानवरू , पठेत सर्वभायान्मुक्तों भविष्यति ना संशय ।।

श्री जगत जननी माँ दुर्गा के नौ नामो से कष्टों से मुक्ति

जो भक्त जन माता दुर्गा की आराधना में मन्त्रों का सही उच्चारण नहीं कर पाते है वह यदि प्रतिदिन माँ दुर्गा के केवल नौ नामों का कम से कम ग्यारह बार भी उच्चारण कर लें तो माता भगवती उनकी हर तरफ से रक्षा करती है ।

1. जया
4. भद्रकाली
5. सुमुखी
2. विजया
6. दुर्मुखी
7. व्याघ्रमुखी
3. भद्रा
8. सिंहमुखी
9. दुर्गा


yantra   Magical Yantra

जीवन में कई बार ऐसा भी समय आता है जब व्यक्ति बहुत परिश्रम करता है , धर्म में भी उसकी आस्था होती है , कोई बुरे कार्य भी नहीं करता है फिर भी उसे उचित फलप्राण नहीं होते है , जीवन में लगातार संघर्ष बना रहता है , ऐसे समय में हम यंत्रों और पूजा पाठ का सहारा लेते है । मनुष्य की हर परेशानी के हल के लिए, हर इच्छा की पूर्ति के लिए अलग - अलग यंत्रों की सहायता ली जाती है । किसी भी मनुष्य के लिए इस तमाम यंत्रों की स्वयं स्थापना और शास्त्रानुसार रखरखाव कर पाना नामुमकिन सा है । लेकिन अब विश्व में पहली बार इस साईट में अनेकों दुर्लभ सिद्ध यंत्रों की प्राण प्र्र्रतिष्ठा की गयी है । इस साईट पर दिए गए सभी यंत्रों को योग्य ब्राह्मणों द्वारा शास्त्रानुसार पूर्ण विधि विधानुसार इस तरह से जप , यज्ञ , द्वारा सिद्ध करकेप्राण प्र्र्रतिष्ठित किया गया है जिससे सभी व्यक्तियों को ( चाहे वह किसी भी धर्म को मानने वाले हो) निश्चित ही अभीष्ट लाभ की प्राप्ति हो । तो अब आप भी इन अत्यंत दुर्लभ यंत्रों का अवश्य ही लाभ उठायें ।

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Durga Ji Second Hindi