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दीपावली कैसे मनाएं

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दीपावली कैसे मनाएं

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Diwali Diye दीपावली पर लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी की पूजा क्यों की जाती है Diwali Diye
Diwali Diye dipawali par lakshmi ji ke sat ganesh ji ki puja kyon ki jati hai Diwali Diye


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Diwali Diye दीपावली पर लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी की पूजा क्यों होती है Diwali Diye
Diwali Diye Dipawali par lakshmi ji ke sath ganesh ji ki puja kyu hoti hai Diwali Diye


दीवाली हिन्दू धर्म का अत्यंत प्रमुख एवं प्राचीन पर्व है। इस दिन सुख समृद्धि की देवी लक्ष्मी माँ के साथ बुद्धि के देवता भगवान गणेश की पूजा करते हैं।
सभी जानते हैं कि लक्ष्मी जी, विष्णु जी की प्राण वल्लभा व प्रियतमा मानी गई हैं. यदि धन की देवी को प्रसन्न करना है तो उनके पति विष्णु जी का उनके साथ पूजन करना आवश्यक माना गया है, शास्त्रों में यह मान्यता है कि लक्ष्मी जी विष्णु जी को कभी नहीं छोड़तीं, वेदों के अनुसार भी विष्णु जी के प्रत्येक अवतार में लक्ष्मी जी को ही उनकी पत्नी का स्थान मिला है. जहां विष्णु जी हैं वहीं उनकी पत्नी लक्ष्मी जी भी हैं. लेकिन फिर भी आज भगवान विष्णु के साथ नहीं बल्कि गणेश के साथ लक्ष्मी का पूजन किया जाता है।

इसका कारण यह है कि कोई भी शुभ कार्य गणेश पूजन के बगैर कभी पूरा नहीं होता। यदि देवी लक्ष्मी सुख-समृद्धि की देवी है तो गणेश जी बुद्धि के देवता कहे गए हैं। यदि किसी व्यक्ति के पास धन-सम्पदा है लेकिन बुद्धि का अभाव है तो वह उस धन का सदुपयोग नहीं कर पायेगा। अतः व्यक्ति का बुद्धिमान होना भी आवश्यक है। यह भी माना जाता है कि माँ लक्ष्मी उसी के पास टिकती हैं, जिसके पास बुद्धि होती है, और गणपति बुद्धि के स्वामी हैं। यही वजह है कि लक्ष्मी एवं गणपति की एक साथ पूजा का विधान है जिससे धन और बुद्धि एक साथ मिले।

चूँकि भगवान श्री विष्णु आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी के ‌द‌िन से देवोत्थान एकादशी तक चार महीने के ल‌िए सो जाते हैं और दीपावली का पर्व हिन्दुओं का प्रमुख पर्व है जिसमें लोग सुख समृद्धि के लिए माँ लक्ष्मी की पूजा करते है अत: दीपावली के दिन माँ लक्ष्मी जी की पूजा विष्णु जी के स्थान पर अपने मानस पुत्र गणेश जी साथ की जाती है

शास्त्रों के अनुसार गणेश जी को लक्ष्मी जी का मानस-पुत्र माना गया है, क्योंकि बाईं ओर पत्नी का आसन माना जाता है। इसलिए पूजा के दौरान लक्ष्मी जी का आसन भगवान गणेश की मूर्ति के दाईं ओर रखना चाहिए। दीपावली पर लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी का पूजन करने में संभवतः एक भावना यह भी कही गई है कि मां लक्ष्मी अपने प्रिय पुत्र की भांति हमारी भी सदैव रक्षा करें. हमें भी उनका स्नेह व आशीर्वाद मिलता रहे। लक्ष्मी जी की पूजा गणेश जी के साथ क्यों होती है इसका पौराणिक ग्रन्थों में एक कथा से प्रमाण मिलता है ।

एक बार एक सन्यासी में राजसुख भोगने की इच्छा हुई इसके लिए उसने देवी लक्ष्मी जी की आराधना की। उसके तप से लक्ष्मी जी ने प्रसन्न होकर उसे वरदान दिया कि उसे राजयोग प्राप्त होगा। अगले दिन वह साधु राज दरवार में पहुचा और वरदान के अभिमान स्वरूप उसने राजा को ठोकर मार दी जिससे राजा का मुकुट नीचे गिर गया यह देखकर राजा व उसके सैनिक उसे मारने के लिए दौड़े परन्तु राजा के गिरे हुए मुकुट से एक कालेनाग लप निकल कर भागते देखकर सभी चौंक गये और साधु को चमत्कारी जानकर उस की जय जयकार करने लगे।

अपनी जान बचाने के कारण राजा ने प्रसन्न होकर उस साधु को अपना मंत्री बना दिया और साधु को रहने के लिए अलग से महल दे दिया जहाँ वह शान से रहने लगा। एक दिन अभिमानवश वह साधु राजा का हाथ पकड़कर उस दरबार से बाहर ले गया। यह देख दरबारी जन भी पीछे भागे। उस सभी के बाहर जाते ही भूकंप आ आया और राज महल खण्डहर में तब्दील हो गया। सब को लगा कि उसी साधु ने सबकी जान बचाई। इस घटना के बाद साधु का मान-सम्मान और भी बढ़ गया। जिससे उसमें अहंकार की भावना और भी ज्यादा विकसित हो गयी।

उस राजा के महल में एक गणेश जी की प्रतिमा भी थी। एक दिन साधु ने अहंकार वश वह प्रतिमा यह कह कर वहाँ से हटवा दी कि यह प्रतिमा देखने में बिल्‍कुल अच्छी नहीं है। साधु के इस कार्य को देखकर गणेश जी रुष्ठ हो गये। बस उसी दिन से उस साधु की बुद्धि बिगड़ गई उससे सब कुछ उल्टा पुल्टा होने लगा। यह देखकर राजा ने नाराज होकर उस साधु को कारागार में डाल दिया। साधू को अपने गलती का अहसास हुआ और जेल में वह पुनः लक्ष्मीजी की आराधना करने लगा। तब लक्ष्मी जी ने दर्शन दे कर उस साधु से कहा कि तुमने गणेश जी का अपमान किया है इसी कारण तुम्हे है दण्ड मिला है अतः गणेश जी की पूजा करके उन्हें प्रसन्न करों तभी तुम्हारे संकट दूर होंगे।

तब वह साधु गणेश जी की आराधना करने लगा। इससे गणेश जी प्रसन्न हुए । और गणेश जी ने राजा के स्वप्न में आ कर कहा कि साधु को पुनः मंत्री बनाया जाये। तब राजा ने गणेश जी के आदेश का पालन किया और साधु को मंत्री पद देकर सुशोभित किया।

तभी से लक्ष्मी जी और गणेश जी की पूजा साथ-साथ होने लगी। यह मान्यता है कि बुद्धि के देवता गणेश जी की भी उपासना लक्ष्मी जी के साथ अवश्य ही करनी चाहिए क्योंकि यदि लक्ष्मी जी अर्थात धन आ भी जाये तो बुद्धि के उपयोग के बिना उन्हें रोक पाना मुश्किल है। इस प्रकार दीपावली की रात्रिमें लक्ष्मीजी के साथ गणेशजीकी भी आराधना की जाती है।


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डा० उमाशंकर मिश्र ( आचार्य जी )


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