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दीपावली क्यों मनाई जाती है

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Diwali Diye दीपावली क्यों मनाई जाती है Diwali Diye
Diwali Diye dipawali kyon manai jati hai Diwali Diye


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Diwali Diye दीपावली का पर्व क्यों मनाया जाता है Diwali Diye
Diwali Diye Dipawali ka parv kyon manaya jata haiDiwali Diye


हम दीपावली Dipawali का त्यौहार क्यूँ मनाते हैं ? ज्यादातर लोग यही जानते है कि 'भगवान श्रीराम जी के लंकापति रावण का वध कर माता सीता को मुक्त कराकर वनवास से लौटने की ख़ुशी में' दीपावली Dipawali का पर्व मनाया जाता है, लेकिन दीपावली का पर्व मनाने का केवल यही एकमात्र कारण नहीं है इस हर्ष-उल्लास के पर्व को मनाने के और भी कई धार्मिक और ऐतिहसिक कारण है जिसके कारण दीपावली का पर्व और भी अधिक महत्वपूर्ण हो गया है .......
जानिए दीपावली क्यों मनाई जाती है, dipawali kyon manai jati hai.....दीपावली किन किन कारणों से मनाई जाती है.....

Diwali Diye राजा राम जी की विजय पर :-

रामायण के अनुसार दशरथ पुत्र भगवान श्री राम ने अपने वनवास काल मे लंका पति राजा रावण का वध कर माता सीता को मुक्त कराया था। भगवान श्री राम माता सीता और भाई लक्ष्मण जी के साथ कार्तिक मास की अमावस्या के दिन ही रावण और उसकी लंका का दहन करकेअयोध्या नगरी में वापिस लौटे थे।
रामायण के अनुसार ये चंद्रमा के कार्तिक मास की अमावस्या के नए दिन की शुरुआत थी तथा इसी शुभ अवसर पर अयोध्या के नागरिकों ने पूरे राज्य को दीपमाला से प्रकाशित किया था और दीपावली का पर्व मनाने की प्रथा प्रारम्भ हुई ।

Diwali Diye भगवान कृष्ण द्वारा नरकासुर राक्षस का वध :-

दीपावली के एक दिन पहले को नरक चतुर्दशी कहते है। क्योंकि इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने राक्षस नरकासुर का वध किया था।
नरकासुर एक पापी राजा था, वह अपने शक्ति के बल से देवताओं पर अत्याचार करता था और अधर्म करता था। उसने अपने बल और अभिमान के कारण सोलह हजार कन्याओं को बंदी बनाकर रखा था। इसलिए भगवान श्री कृष्ण ने नरकासुर का वध करके उन कन्याओं को मुक्त कराया था । इसलिए इस दिन को नरक चतुर्दशी कहते है और उस दिन से बुराई पर सत्य की जीत पर लोगो ने दो दिनों तक हर्ष और उल्लास के साथ दीपक जलाकर दीपावली का त्यौहार मनाया। इसे विजय पर्व के नाम से भी जाना जाता है।

Diwali Diye भगवान श्री विष्णु ने राजा बलि से तीनो लोको को मुक्त कराया :-

महाप्रतापी तथा दानवीर राजा बलि ने अपने बाहुबल से तीनों लोकों पर विजय प्राप्त कर ली, तब राजा बलि से भयभीत देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने वामन रूप धारण कर प्रतापी राजा बलि से दान के रूप में तीन पग पृथ्वी मांगी।
महाप्रतापी राजा बलि भगवान विष्णु की चालाकी समझ गए लेकिन फिर भी उन्होंने याचक को निराश नहीं किया और तीन पग पृथ्वी दान में दे दी।

भगवान श्री विष्णु ने अपने तीन पग में तीनों लोकों को नाप लिया। वह दिन कार्तिक अमावस्या का था , राजा बलि की दानशीलता से प्रभावित होकर भगवान विष्णु ने उन्हें पाताल लोक का राज्य दे दिया, साथ ही यह भी आश्वासन दिया कि उनकी याद में भू लोकवासी प्रत्येक वर्ष दीपावली मनाएंगे।

Diwali Diye पांडवो की वापसी ;-

महाभारत के अनुसार कार्तिक अमावस्या को पांडव अपना 12 साल का वनवास काट कर वापिस आये थे जो की उन्हें कौरवों द्वारा चौसर खेल में हराये जाने के परिणाम स्वरूप मिला था। इस प्रकार पांडवो के लौटने की खुशी में दीपावली मनाई गई थी ।

Diwali Diye आर्य समाज के लिए प्रमुख दिन:-

कार्तिक अमावस्या अर्थात दीपावली के दिन ही एक महान व्यक्ति स्वामी दयानंद सरस्वती जी ने हिंदुत्व का अस्तित्व बनाये रखने के लिए आर्य समाज धर्म की स्थापना की थी।

Diwali Diye विक्रमादित्य का राजतिलक:-

दीपावली के दिन ही भारत के महान राजा विक्रमदित्य का राज्याभिषेक हुआ था। जिसके कारण राजा विक्रमादित्य के राज्य में लोगो ने हर्ष उल्लास के साथ दीपावली का पर्व मनाया था ।

Diwali Diye जैन धर्म का एक महत्वपूर्ण दिन:*

दीपावली का जैन धर्म में भी बहुत महत्त्व है।शास्त्रों के अनुसार जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर भगवान महावीर ने भी दीपावली के दिन ही बिहार के पावापुरी में अपना शरीर त्याग दिया।
महावीर-निर्वाण संवत्‌ इसके दूसरे दिन से शुरू होता है। इसलिए अनेक प्रांतों में इसे वर्ष के आरंभ की शुरुआत मानते हैं।

Diwali Diye सिक्खों के लिए महत्त्व :-

तीसरे सिक्ख गुरु अमरदास जी ने दीपावली के दिन को लाल पत्र दिवस के रूप में मनाया था जिसमें सभी श्रद्धालु गुरु से आशीर्वाद लेने पहुंचे थे और 1577 में अमृतसर में हरिमंदिर साहिब का शिलान्यास किया गया था।
1619 में सिक्ख गुरु हरगोबिन्द जी को ग्वालियर के किले में 52 राजाओ के साथ मुक्त किया गया था जिन्हें मुगल बादशाह जहांगीर ने नजरबन्द किया हुआ था। इसे सिक्ख समाज बंदी छोड़ दिवस के रूप में भी जानते हैं।

Diwali Diye प्राचीन इतिहास :-

ईसा पूर्व चौथी शताब्दी में रचित कौटिल्य अर्थशास्त्र के अनुसार कार्तिक अमावस्या के अवसर पर मंदिरों और घाटों (नदी के किनारे) पर बड़े पैमाने पर दीप जलाए जाते थे।


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डा० उमाशंकर मिश्र ( आचार्य जी )


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