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डेंगू के घरेलू उपचार , डेंगू के आयुर्वेदिक उपचार, इलाज


डेंगू

hand-logo यदि रोगी बार बार उलटी कर रहा हो तो उसे सेब के रस में थोडा नीम्बू मिला कर दें, इससे उल्टियाँ बंद हो जाएंगी

hand-logo डेंगू के इलाज में पपीते के पत्तों का रस सबसे ज्यादा उपयोगी माना जाता है। पपीते का पेड़ समान्यता घर के आसपास बहुत ही आसानी से मिल जाता है ।
मरीज़ को दिन में 3 - 4 बार पपीते की ताज़ी पत्तियों का रस निकाल कर दें , इससे एक दिन में ही प्लेटलेट की संख्या में सुधार होने लगता है । रोगी को दिन में कई बार पपीता भी खिलाना चाहिए ।

hand-logo डेंगू के इलाज में गिलोय की बेल का सत्व बहुत जी ज्यादा महत्वपूर्ण है। गिलोय एक बहुत ही चमत्कारी औषधि है। इसके पत्ते पान के पत्तों की तरह होते हैं। किसी भी प्रकार के रोगाणुओं, जीवाणुओं आदि से पैदा होने वाली बीमारियों जैसे डेंगू, स्वाइन फ्लू, मलेरिया आदि; रक्त के प्रदूषित होने से पुराने बुखार एवं यकृत की कमजोरी के लिए गिलोय रामबाण की तरह काम करती है।

गिलोय बेल की डंडी को लेकर सबसे पहले उसके छोटे टुकड़े करें, इसमें 8 -10 तुलसी के पत्ते भी डाल दें। फिर उसे 2 गिलास पानी मे उबालें, जब पानी आधा रह जाए तो उसे उबालना बंद कर दें। अब इसको थोड़ा ठंडा करके रोगी को पिलाएं। ऐसा दिन में 3 - 4 बार करें । इसके पहली बार के सेवन के 2 घंटे बाद से ही शरीर में ब्लड प्लेटलेट्स बढ़ने शुरू हो जाते है और बुखार भी नियंत्रित हो जाता है।
गिलोय के रस से शरीर में रोग से लड़ने की शक्ति बढती है , कमजोरी दूर होती है तथा कई अन्य रोगों का भी नाश होता है। इसकी कड़वाहट को कम करने के लिए इसे किसी अन्य जूस में मिलाकर पियें यदि गिलोय की बेल आपको ना मिले तो किसी भी पतंजली चिकित्सालय में जाकर "गिलोय घनवटी" ले आयें और रोगी को उसकी एक एक गोली दिन में 3 बार दें।

इसके अतिरिक्त नींबू का रस भी बहुत ही कारगार सिद्ध होता है । नींबू में विटामिन सी बहुत अधिक मात्रा में पाया जाता है । डेंगू के मरीज़ को नींबू का रस बार बार देना चाहिए। इससे पूरे शरीर की अंदर से सफाई हो जाती है । नींबू के रस के सेवन से पेशाब द्वारा शरीर से डेंगू के वायरस निकलने लगते हैं। इससे रोगी को शीघ्र ही आराम मिलता है ।

डेंगू से बचाव के लिए किसी भी होमपयोपैथिक की दुकान से "यूपेटोरियम परफोलिएटम-200" की एक हफ्ते तक खाली पेट सुबह डोज लीजिये, डेंगू से बचे रहेंगे।

डेंगू बुखार के इलाज के लिए निम्नलिखित आयुर्वेदिक दवा का इस्तेमाल कीजिये ।

hand-logo महासुदर्शन घन वटी एक गोली

hand-logo सप्त पर्ण घन वटी एक गोली

hand-logo महाज्वरान्कुश रस एक गोली

hand-logo आनद भैरव रस एक गोली

इन चार गोलियों को मिलाकर एक खुराक दवा बनती है । इस दवा को सादे / गुनगुने पानी अथवा चाय या दूध से दो दो घन्टे के अन्तराल से अथवा तीन या चार घन्टे के अन्तराल से देना चाहिये। एक या दो दिन में बुखार और इसके सभी दुष्प्रभाव ठीक हो जाते है।

उपरोक्त दी गयी खुराक एक पूर्ण वयस्क वयक्ति के लिये है । छोटे ब्च्चों के लिये आधी या चौथायी खुराक ही दे ।



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