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छठ पर्व

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om छठ पूजा का महत्व om
om chhath pooja ka mahatva om


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om छठ पूजा की कथा om
om chhath pooja ki katha om




कार्तिक शुक्ल की षष्टी तिथि को सुख-समृद्धि, गुणवान पुत्र प्राप्ति, आरोग्यता, वा पुत्र को दीर्घायु रखने के लिए षष्टी का पर्व मनाया जाता है। इसमें छठ देवी और भगवान सूर्य की आराधन करते हुए उपवास किया जाता है,
जानिए छठ पूजा का महत्व, chhath pooja ka mahatva,छठ पूजा की कथा, chhath pooja ki katha ।

om छठ पूजा को लेकर कई पौराणिक , ऐतहासिक कथाएं प्रचलित हैं। हालांकि, माना जाता है कि महाभारत काल से छठ मां की पूजा की शुरुआत विधि-विधान से हुई।

om एक कथा के अनुसार जब पांडव जुआ में कौरवो से अपना सारा राज हार गए, तब द्रौपदी ने छठ देवी जो सूर्य देव की बहन हैं का व्रत रखा था । इस ब्रत से छठ देवी के आशीर्वाद से द्रोपदी की मनोकामनाएं पूरी हुईं और पांडवों ने फिर से अपना राजपाट वापस ले लिया था।
मान्यता है कि चूँकि भगवान सूर्य देव और छठी देवी दोनों आपस में भाई बहन हैं इसलिए छठ पर्व के अवसर पर सूर्य देव की आराधना विशेष फलदायी कही गई है।

om एक अन्य कथा के अनुसार महाभारत काल में कुन्ती को दुर्वासा ऋषि ने वरदान दिया था उस वरदान की सत्यता को जानने के लिए जब कुंती कुंवारी थी तब भगवान सूर्य का आह्वान करके पराक्रमी पुत्र की इच्छा जताई। तब भगवान सूर्य ने कुंवारी कुंती को कर्ण जैसा पराक्रमी और दानवीर पुत्र दिया।
मान्यताओं के अनुसार तभी से कर्ण की तरह ही पराक्रमी पुत्र के लिए छठ पूजा सूर्य की आराधना के रूप में की जाती है।

om इस सन्दर्भ में एक कथा यह भी है कि जब मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम लंका पर आक्रमण कर रावण का वध कर अयोध्या आपस आये तो उन्होंने कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को भगवान सूर्यदेव की उपासना करके उनसे आशीर्वाद मांगा ।
अपने राजा भगवान श्रीराम को सूर्यदेव की उपासना करते देखकर उनकी प्रजा ने भी षष्ठी का व्रत रखना प्रारम्भ कर दिया। मान्यता है कि तभी से कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी को छठ पर्व मनाया जाता हैं।

om एक अन्य कथा के अनुसार छठ पर्व की शुरुआत महाभारत काल कही गयी है। कहते है कि सूर्यपुत्र कर्ण जो बहुत बड़े दानी थे उन्होंने सबसे पहले कार्तिक शुक्ल की षष्टी को श्रेष्ठ वीर बनने के लिए भगवान सूर्य की पूजा की थी ।
कर्ण को भगवान सूर्य पर अटूट श्रद्धा थी वह सूर्य देव के बहुत बड़े भक्त थे और नित्य प्रात: कमर तक पानी में खड़े होकर भगवान सूर्य को अर्घ्य देते थे, इसी कारण से ही वो महान वीर, महान योद्धा कहलाये, और तभी से छठ पूजा में अर्घ्य दान की भी परंपरा चली आ रही है।
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ज्योतिषाचार्य अखिलेश्वर पाण्डेय
भृगु संहिता, कुण्डली विशेषज्ञ

वैदिक, तंत्र पूजा एवं अनुष्ठान के ज्ञाता







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