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छठ पर्व

chhath-parv

om छठ पर्व om


chhath-parvi


सुख-समृद्धि,श्रेष्ठ सन्तान तथा मनोकामनाओं की पूर्ति का छठ पर्व भगवान सूर्य की आराधना का पर्व है। छठ का अर्थ है षष्टी , अतः षष्टी तिथि के दिन सूर्य षष्ठी का व्रत होने के कारण इसे छठ कहा गया है। छठ में प्रात:काल उगते सूर्य की पहली किरण और सायंकाल में सूर्य की अंतिम किरण को अर्घ्य देकर दोनों का नमन करते है । छठ के ब्रत में लोग बिना अन्न जल के पूरे 36 घंटों तक उपवास रखते है।

वर्ष 2016 में छठ पर्व कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि शुक्रवार 4 नवम्बर से सप्तमी तिथि सोमवार 7 नवम्बर तक मनाया जायेगा ।

om वैसे तो भगवान सूर्य की उपासना का यह पवित्र पर्व मुख्यता बिहार, झारखण्ड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में ही मनाया जाता था लेकिन धीरे धीरे यह पर्व ना केवल पूरे भारत वरन विश्वभर मे जहाँ जहाँ पर पूर्वांचल के इन राज्यो के लोग है मनाया जाने लगा है।

om भारत की राजधानी दिल्ली एवं आर्थिक राजधानी मुम्बई सहित पंजाब, हरियाणा,महाराष्ट्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, उत्तराँचल आदि राज्यो में भी इसका बहुत बड़े पैमाने पर आयोजन होने लगा है और यहाँ पर भी बड़ी संख्या में लोग पूर्ण श्रद्धा से छठ पर्व मनाते है ।

om छठ पूजा का पर्व चार दिनों का अत्यंत कठिन महापर्व होता है जो कार्तिक शुक्ल की चतुर्थी तिथि से प्रारम्भ हो जाता है और यह कार्तिक शुक्ल की सप्तमी को पूर्ण होता है। छठ त्यौहार में बाजारों में लोग इसके लिए फल, गन्ना, डाली और सूप आदि की खरीददारी करते हैं।

om छठ पूजा के प्रथम दिन कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को ‘नहाय-खाय’ के रूप में मनाते है । छठ पर्व के प्रथम दिन श्रद्धालु अपने घर कि साफ़ सफाई करके अपने घर को पूरी तरह से शुद्ध करते है। इसमें छठी माता को जल एवं फूल अर्पित करते हुए आमंत्रण दिया जाता है।
इस दिन व्रत रखने वाले श्रद्धालु घी में बनाई लौकी की सब्जी, चने की दाल एवं चावल खाते हैं।

om नहाए-खाए के दूसरे दिन कार्तिक शुक्ल पंचमी को खरना किया जाता है। इसमें शाम को सूर्यास्त से पूर्व भगवान सूर्य देव को जल में पुष्प डाल का अर्घ्य दिया जाता है। खरना पूजन के साथ ही घर में देवी षष्ठी का आगमन माना जाता है।
पंचमी को दिन भर उपवास रखने वाले श्रद्दालु शाम के समय गुड़ से बनी खीर, रोटी और फल का प्रसाद ग्रहण करते है, फिर अगले दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने तक जल भी ग्रहण नहीं करते है ।
खरना का प्रसाद आस पास के सभी लोगो, परिचितों में बांटा जाता है, खरना के दिन ब्रती नमक और चीनी का उपयोग नहीं करते है।

om इसके अगले दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को छठ का प्रसाद बनाया जाता है। प्रसाद में चावल के लड्डू बनाये जाते है। शाम के समय एक बाँस की टोकरी में भगवान सूर्य को अर्घ्य देने वाले सूप को सजाकर लोग इसे लेकर पैदल ही घाट पर जाते है और सामूहिक रूप से सूर्य को अर्घ्य देते है।
सूर्य भगवान् को जल और दूध से अर्घ्य दिया जाता है एवं छठी मैया की प्रसाद से भरे हुए सूप से पूजा आराधना की जाती है।

om इस दिन संध्या को जल में कमर तक जाकर डूबते हुए सूर्य और दूसरे दिन उगते हुए सूर्य को अर्ध्य देकर उनसे अपने और अपने परिवार के लिए आशीर्वाद मांगते है।

om छठ पूजा के चौथे यानि कार्तिक शुक्ल की सप्तमी को सभी लोग घाट पर फिर से उसी जगह पर इकठ्ठा होकर जहाँ पर उन्होंने संध्या को सूर्य देव को अर्घ दिया था प्रात: उगते हुए सूर्य कि पूजा करते हुए उन्हें अर्ध्य देते है, और उनसे गुणवान, दीर्घायु पुत्र, परिवार में सुख-समृद्धि की कामना करते हुए, उनसे आशीर्वाद माँगते हुए सभी लोग कच्चे दूध का शरबत पीकर अपना व्रत पूर्ण करते है।

om मान्यता है कि यदि जो भी जातक इन दिनों में प्रांत: सूर्य देव को अर्घ्य देते है भगवान सूर्य उनकी सभी मनोकामनाएँ अवश्य ही पूर्ण करते है ।






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