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चंद्र ग्रहण
Chandra grahan



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चंद्र ग्रहण में विशेष
Chandra grahan me vishesh


शास्त्रों के अनुसार चंद्रग्रहण chandra grahan का बहुत अधिक धार्मिक महत्व है , इस समय किये गए जप, तप, दान से अनंत गुना पुण्य मिलता है वहीँ पर यदि ग्रहण काल में कुछ गलत किया जाय जो शास्त्रों में मना किया गया है तो उसके गंभीर परिणाम होते है , व्यक्ति को पाप का भागी होना पड़ता है। अत: यह जानना आवश्यक है कि चंद्रग्रहण chandra grahan में क्या करें और क्यां ना करे। यहाँ पर हम कुछ बातो को बता रहे है जिनका ग्रहण काल में अवश्य ही पालन करना चाहिए । जानिए चंद्र ग्रहण में विशेष, chandra grahan men vishesh, चंद्र ग्रहण में क्या करे क्या ना करें, chandra grahan men kya karen kya na karen

hand-logo हिंदू धर्म के मतानुसार चंद्र ग्रहण ( Chandra grahan ) का प्रभाव शुभ नहीं माना जाता। ग्रहण के अशुभ प्रभावों से निजात पाने के लिए ग्रहण के दिन गरीबों को अवश्य ही दान दें, भोजन कराएं, गायत्री मंत्र का भी ज्यादा से ज्यादा जाप करें। अपने ईष्‍ट देव की आराधना करें और ग्रहण के समय उपवास रखें।

hand-logo ग्रहण के समय गायों को हरी घास/ साग , पक्षियों को अन्न, चींटियों को भुना हुआ आटा, जरूरत मंदों को दान देने से अनेकों अनेक गुना पुण्य प्राप्त होता है।

hand-logoचंद्रग्रहण ( Chandra Grahan ) के उपरांत स्‍नान कर ताजे भोजन का ही सेवन करें।

hand-logo सूर्यचंद्रग्रहण मे चार प्रहर पूर्व और चंद्र चंद्रग्रहण ( Chandra Grahan ) मे तीन प्रहर पूर्व भोजन नहीं करना चाहिये । बूढे बालक और रोगी एक प्रहर पूर्व तक खा सकते हैं चंद्रग्रहण पूरा होने पर सूर्य या चंद्र, जिसका चंद्रग्रहण हो, उसका शुध्द बिम्ब को देख कर ही भोजन करना चाहिये । (1 प्रहर = 3 घंटे)।

hand-logo चंद्रग्रहण ( Chandra Grahan ) में 9 घंटे पहले सूतक लग जाता है । सूतक काल में जहाँ देव दर्शन वर्जित माने गये हैं वहीं मन्दिरों के पट भी बन्द कर दिये जाते हैं । इस दिन जलाशयों, नदियों व मन्दिरों में राहू, केतु व सुर्य के मंत्र का जप करने से सिद्धि प्राप्त होती है और ग्रहों का दुष्प्रभाव भी खत्म हो जाता है ।

hand-logo हमारे ऋषि मुनियों ने चंद्रग्रहण ( Chandra Grahan ) के समय भोजन करने के लिये मना किया है, क्योंकि उनकी मान्यता थी कि चंद्रग्रहण के समय वातावरण में घातक किटाणु बहुलता से फैल जाते हैं जो खाद्य वस्तु, जल आदि में एकत्रित होकर उसे दूषित कर देते हैं। इसलिये भोजन / जल के पात्रों में क़ुश अथवा तुलसी डालने को कहा है, ताकि सब किटाणु उनमें एकत्रित हो जायें और उन्हें चंद्रग्रहण ( Chandra Grahan ) के बाद फेंका जा सके।

hand-logo जीव विज्ञान के प्रोफेसर टारिंस्टन ने भी पर्याप्त अनुसन्धान करके सिद्ध किया है कि चंद्रग्रहण ( Chandra Grahan ) के समय मनुष्य के पेट की पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है, जिसके कारण इस समय किया गया भोजन अपच, अजीर्ण आदि शिकायतें पैदा कर शारीरिक या मानसिक हानि पहुँचा सकता है ।

hand-logo देवी भागवत में कहा गया है कि चंद्रग्रहण ( Chandra Grahan ) के समय भोजन करने वाला मनुष्य जितने अन्न के दाने खाता है, उतने वर्षों तक अरुतुन्द नामक नरक में दुःख भोगता है। फिर वह उदर रोग से पीड़ित मनुष्य होता है फिर काना, दंतहीन और अनेक रोगो से पीड़ित होता है।

hand-logo चंद्रग्रहण ( Chandra Grahan ) के बाद नया भोजन बनाने और ताजा पानी भरकर पीना ही श्रेयकर माना जाता है | जबकि पके हुए अन्न को पूरी तरह से त्यागकर गाय, कुत्ते को डाल देना चाहिए । चंद्रग्रहण के बाद स्नान करने का विधान इसलिये बनाया गया ताकि स्नान के दौरान शरीर के अन्दर ऊष्मा का प्रवाह बढे, भीतर बाहर के जो भी किटाणु हो वह नष्ट हो जायें, बह जायें।

hand-logo चंद्रग्रहण ( Chandra Grahan ) की अवधि में सोना, तेल लगाना, भोजन करना, जल पीना, मल-मूत्र का त्याग करना, बालों में कँघी करना, रति क्रीडा करना, मंजन करना,शरीर पर उबटन लगाना सर्वथा वर्जित माने गये हैं ।

hand-logo मान्यता है कि चंद्रग्रहण ( Chandra Grahan ) के समय सोने,भोजन करने से रोगी, लघुशंका करने से दरिद्र, मल त्यागने से कीड़ा, सम्भोग करने से सूअर और उबटन लगाने से व्यक्ति कोढ़ी हो जाता है।

hand-logo इसीलिए चंद्रग्रहण ( Chandra Grahan ) के समय से पहले भी ऐसा कुछ भी नहीं खाना चाहिए जिससे मल मूत्र के त्याग हेतु लैट्रिन, बाथरूम में जाना पड़े ।





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