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भाई दूज का महत्व

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Diwali Diye भैया दूज Diwali Diye
Diwali Diye Bhaiya Dooj
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Diwali Diye भाई दूज का महत्व Diwali Diye
Diwali Diye Bhaiya Dooj Ka Mahtv
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गोवर्धन पूजा के अगले दिन भाई दूज Bhaiya dooj या यम दीतिया मनाई जाती है ।

इस दिन का हिन्दू धर्म में बहुत महत्त्व है, शास्त्रों के अनुसार भाई और बहन के निश्छल प्रेम के प्रतीक भाई दूज के पर्व की शुरुआत यमुना और उनके भाई यमराज की एक कथा से है।

Kalash One Image इस दिन प्रत्येक पुरुष को अपनी छोटी बहिन के घर भोजन करना चाहिए , अगर छोटी बहन न हो तो बड़ी या रिश्ते की किसी भी बहन के यहाँ भोजन करना चाहिए , इस दिन प्रत्येक व्यक्ति यदि विवाहित है तो अपनी पत्नी सहित अपने बहन के यहाँ जाये प्रेम से भोजन करें उसके बाद यथाशक्ति अपनी बहन को भेंट दें और तिलक कराएँ तो उसके सौभाग्य में वृद्धि होती है । इस दिन सभी बहनों को अपने भाइयों को तिलक लगाकर उनके दीर्घायु की कामना करनी चाहिए ।

Kalash One Image इस दिन के लिए स्वयं यमराज ने कहा है की जो व्यक्ति आज के दिन यमुना में स्नान करके बहन के घर उसका पूर्ण श्रद्धा से पूजन करके अपने तिलक करवाएंगे अपनी बहन को पूर्णतया संतुष्ट करेंगे उसके हाथ से बनाया भोजन प्रेम पूर्वक करेंगे वे कभी भी अकाल म्रत्यु को प्राप्त करके मेरे दरवाजे को नहीं देखेंगे ।

Kalash One Image यमराज जी कहते है की इस दिन किसी भी पुरुष को अपने घर में किसी भी दशा में भोजन नहीं करना चाहिए ।

Kalash One Image श्री सूर्य भगवान ने तो यहाँ तक कहा है की जो मनुष्य यम दीतिया के दिन बहन के हाथ का भोजन नहीं करता है उसके साल भर के सभी पुण्य नष्ट हो जाते है ।

Kalash One Image आविवाहित बहन के होने पर उसी बहन के हाथों का ही बना भोजन करना चाहिए ।

Kalash One Image सनतकुमार संहिता में कहा गया है की जो स्त्री कार्तिक शुक्ल पक्ष की दीतिया को अपने भाई को आदरपूर्वक बुलाकर सुरुचि पूर्वक भोजन कराती है तथा भोजन के बाद उसे पान खिलाती है वह सदा सुहागन रहती है , साथ ही ऐसी बहन के भाई को भी दीर्घ आयु की प्रप्ति होती है .इस लिए इस दिन बहन के हाथों से पान जरुर खान चाहिए ।

Kalash One Image लिंग पुराण में वर्णित है की जो कन्या / स्त्री इस दिन अपने भाई का पूजन करके उसको तिलक नहीं लगाती है उसका सम्मान नहीं करती है वह सात जन्म तक बिना भाई के ही रहती है ।

Kalash One Image यह भी मान्यता है की भगवान श्रीकृष्ण नरकासुर को मारने के बाद इसी दिन अपनी बहन सुभद्रा का घर गए थे। वहां सुभद्रा ने भगवान श्रीकृष्ण के मस्तक पर तिलक लगा कर उनकी आरती उतार कर उनका स्वागत किया था। तभी से भी भाई दूज का यह पवित्र त्यौहार मनाया जाने लगा है।

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पं मुक्ति नारायण पाण्डेय
( कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )



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