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भगवान शिव की बहन
Bhagwan Shiv ki Bahan


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पार्वती जी की ननद
Parvati Ji ki Nanad


hand-logo भगवान शिव की एक बहन असावरी देवी (Bhagwan Shiv ki Bahan Asavari Devi) भी है । एक पौराणिक कथा के अनुसार जब देवी पार्वती (Devi Parwati) ने भगवान शिव (Bhagwaan Shiv) से विवाह किया तो पार्वती जी की अकेलेपन के कारण इच्छा हुई कि उनकी एक ननद होती जिससे उनका मन लगा रहता, भगवान शिव ने देवी पार्वती (Devi Parwati) के मन की बात जान ली ।
भगवान शिव (Bhagwaan Shiv) ने कहा मैं तुम्हें ननद तो लाकर दे दूं लेकिन ननद के साथ आपकी बनेगी नहीं क्योंकि ननद का स्थान उसके अपने घर अपनी ससुराल में होता है मायके में नहीं। लेकिन माँ पार्वती नहीं मानी, तब भगवान शिव (Bhagwaan Shiv) ने अपनी माया से एक देवी को उत्पन्न कर दिया. इनका नाम असावरी देवी था ।

hand-logo देवी पार्वती अपनी ननद को देखकर बड़ी खुश हुईं। उन्होंने सोचा की उनकी अपनी ननद से खूब निभेगी, उनका मन लगा रहेगा, लेकिन कुछ ही समय में माँ पारवती अपनी ननद की हरकतों से परेशान होने लगी ।
असावरी देवी (Asavari Devi) ने स्नान के बाद भोजन माँगा, माँ पारवती ने उन्हें खूब चाव से भोजन बना कर परोसा, लेकिन वह सब खा गयी और उन्होंने फिर से भोजन की मांग की, दोबारा भोजन देने से भी उनका पेट नहीं भरा और वह पार्वती जी के भंडार में जो कुछ भी था सब खा गईं , महादेव के लिए कुछ भी नहीं बचा।
फिर जब देवी पार्वती (Devi Parwati) ने ननद को पहनने के लिए नए सुन्दर वस्त्र दिए तो असावरी देवी (Asavari Devi) जो मोटी थी उनके लिए वह वस्त्र छोटे पड़ गए, पार्वती उनके लिए दूसरे वस्त्र का इंतजाम करने लगीं। असवारी देवी (Asavari Devi) नित्य नए वस्त्र माँगने लगी ।

hand-logo असवारी देवी (Asavari Devi) शरारती भी बहुत थी और उनकी शरारत से दूसरे आफत में पड़ जाते थे। उन्होंने माँ पार्वती को परेशान करने का सोचा और ननद रानी ने मजाक में अपने पैरों की दरारों में माँ पार्वती जी को छुपा लिया। पार्वती जी का दम घुटने लगा, उन्होंने बाहर निकलने के लिए आवाज दी लेकिन असावरी देवी (Asavari Devi) नहीं मानी और इधर उधर चलने लगी ।
तभी भगवान भोलेनाथ आ गए और माँ पार्वती को ना देखकर उन्होंने जब असावरी देवी (Asavari Devi) से पार्वती जी के बारे में पूछा तो असावरी देवी (Asavari Devi) ने झूठ बोला की उन्हें नहीं मालूम । तब भगवान शिव समझ गए कि यह इसकी बदमाशी है उन्होंने असवारी देवी से पार्वती देवी के बारे में दोबारा पूछा तब असावरी देवी (Asavari Devi) ने हंसने हुए जमीन पर पांव पटक दिया इससे पैर की दरारों में दबी देवी पार्वती बाहर आ गिरीं ।

hand-logo अपनी ननद के व्यवहार से देवी पार्वती क्रोधित हो गयी और उन्होंने महादेव से कहा कि मुझसे बड़ी भूल हुई जो मैंने आपकी बात नहीं मानी अब आप कृपया मेरी ननद को जल्दी से ससुराल भेज दे, इस पर भगवान शिव मुस्कुराये और उन्होंने असावरी देवी को कैलाश से विदा कर दिया।




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