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अमावस्या पर प्राप्त करें दैवीय कृपा

डेंगू

Diwali Diye अमावस्या पर प्राप्त करें दैवीय कृपा Diwali Diye


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ज्योतिष एवं तंत्र शास्त्र में अमावस्या तिथि का बहुत महत्व है । अमावस्या तिथि को हर तरफ घोर अन्धकार छाया होता है , ऐसे में यदि कोई मनुष्य नियमपूर्वक स्वच्छ वस्त्र धारण करके अमावस्या की रात्रि में कुछ स्थानों में दीपक का प्रकाश करें तो उस जातक को ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त होता है ।
शास्त्रों के अनुसार अमावस्या की रात में इन पाँच स्थानों में तेल का दीपक जलाने से दैवीय कृपा प्राप्त होती है , माँ लक्ष्मी का स्थाई निवास होता है ।

Diwali Diye हिंदू धर्म में तुलसी को सर्वाधिक पवित्र तथा माता स्वरुप माना जाता है। सामान्यता सभी हिन्दु परिवारों में तुलसी अवश्य ही मिलती है, तुलसी माँ को घर-घर में पूजा जाता हैं। भगवान श्री विष्णु और उनके सभी अवतारों को तुलसी के बिना भोग सम्पूर्ण ही नहीं समझा जाता है। शास्त्रों के अनुसार अमावस्या की रात में तुलसी के निकट एक दीपक अवश्य ही जलाना चाहिए। इससे भगवान विष्णु अति प्रसन्न होते है एवं माँ लक्ष्मी भी उस घर को कभी भी छोड़ कर नहीं जाती है ।

Diwali Diye हिन्दु धर्म शास्त्रों एवं वास्तु के अनुसार घर के मुख्य द्वार को बहुत साफ और सजा कर रखना चाहिए, इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा रहती है। शास्त्रों के अनुसार अमावस्या की रात में घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर एक एक दीपक अवश्य ही जलाएं, इससे घर में प्रेम, हर्ष - उल्लास और ऊर्जा का वातावरण बनता है, माँ लक्ष्मी की असीम कृपा बनती है ।

Diwali Diye शास्त्रों के अनुसार अमावस्या की रात में घर की छत पर भी एक दीपक अवश्य ही जलाएं इससे घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है, घर में किसी भी अशुभ शक्तियों का प्रवेश नहीं होता है ।अमावस की रात में घर की छत पर दीपक जलाने से माँ लक्ष्मी की सदैव कृपा बनी रहती है ।

Diwali Diye अमावस्या की रात्रि को सर्वत्र गहन अंधकार होता है। अमावस्या की गहन अँधेरी रात को घर के मंदिर में भी एक दीपक अवश्य ही जलाएं, इससे हमें अपने इष्ट देवता, कुल देवता और सभी देवताओं की पूर्ण कृपा प्राप्त होती है घर धन धान्य से भरा रहता है ।

Diwali Diye पीपल पर देवताओं और पितरों दोनों का वास माना गया है । अमावस्या की रात को पीपल के नीचे एक दीपक अवश्य ही जलाना चाहिए इससे शनि, राहु - केतु का प्रकोप शान्त होता है, कुंडली के ग्रहों के शुभ फल मिलते है एवं पितरों की भी पूर्ण कृपा मिलती है। यदि पीपल का पेड़ किसी मंदिर में हो तो और भी उत्तम है ।




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