Diwali Diyeधनतेरस, दीपावली का शुभ मुहूर्त  diya Image


Diwali Diyeपांच दिवसीय दिवाली के शुभ मुहूर्त  diya Image

 
दीपावली 5 पर्वों का पर्व माना जाता है । दीपावली के 5 अति शुभ पर्व धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज तक चलते है। इस पाँचों दिनों का अपना अलग और विशेष महत्व है । इन सभी दिनों में की गयी पूजा अर्चना, और उपायों को यदि हम सही मुहूर्तों में करें तो व्यक्ति के सभी मनोरथ सिद्ध हो जाते है उसे जीवन में किसी भी चीज़ का आभाव नहीं रहता है ।

इस बार धनतेरस मंगलवार को पड़ने से विशेष फलदायी है । शास्त्रों के अनुसार यदि किसी व्यक्ति ने कर्ज लिया है तो उसे मंगलवार को उसकी वापसी करनी चाहिए अत: इस दिन कर्ज मुक्ति का प्रयास करने से जीवन में सुख समृद्धि और स्थाई लक्ष्मी प्राप्त होने का योग बनता है। लेकिन ध्यान रहे कि इस दिन कर्जा भूल कर भी ना लें ।

धनतेरस के दिन सुबह 10.35 से मध्यान 1.22 तक का समय सोना चाँदी, वाहन , जमीन, इलेक्ट्रॉनिक्स सामान आदि खरीदने के लिए अति शुभ है । इसके अतिरिक्त साँय 7.36 से रात्रि 9 बजे तक फिर रात्रि 10.30 से पूरी रात्रि खरीददारी का शुभ महूर्त है, इसलिए जहाँ तक संभव हो हर किसी को इन्ही समय में अपनी विशेष खरीददारी करनी चाहिए ।

धनतेरस के दिन भगवान धन्वन्तरि, भगवान कुबेर जी और माता लक्ष्मी की पूजा भी होती है । इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त वृष लगन में शाम 6.57 से रात्रि 8.49 तक है अत: इस समय हर व्यक्ति को अपने घर और प्रतिष्ठान में पूजा अवश्य ही करनी चाहिए ।

धनतेरस से शुरू करके 5 दिनों तक व्यक्ति को दीपदान अवश्य ही करना चाहिए ।( इसके लिए इस साइट पर धनतेरस कैसे मनाये देखें )

धनतेरस के अगले दिन नरक चतुर्दशी / रूप चतुर्दशी / हनुमान जयंती है । इस दिन पितरों का तर्पण अवश्य चाहिए । इस दिन सुबह भगवान यम का तर्पण करके शाम को घर की चौखट पर यम दीपक जलाने से उस घर में किसी की भी अकाल मृत्यु नहीं होती है । इस दिन भगवान संकटमोचन हनुमान की पूजा अवश्य ही करनी चाहिए । ( इस दिन का सम्पूर्ण लाभ लेने के लिए इस साइट पर छोटी दिवाली के उपाय देखें )

कार्तिक अमावस्या में दीपावली पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या 23 अक्टूबर, गुरुवार को पड़ रही है । दीपावली में माँ लक्ष्मी का विशेष पूजन किया जाता है। इस दिन रात्रि को जागरण करके धन की देवी लक्ष्मी माता का विधिपूर्वक पूजन करने से मनुष्यों को सभी भौतिक सुख सुविधाओं की प्राप्ति होती है। लक्ष्मी माँ की प्रदोष काल, स्थिर लग्न में पूजा विशेष फलदायी मानी गयी है।


दीपावली की पूजा सभी मनुष्यों को अपने घर एवं प्रतिष्ठानो दोनों ही जगह करनी चाहिए । जो व्यापारीगण अपने प्रतिष्ठान में पूजन-अर्चन करते हैं उनके लिए दोपहर 1.42 से शाम 4.30 तक तक का समय उत्तम है इसमें भी 2.08 बजे से 3.33 तक का समय बहुत ही उत्तम है।

घर पर प्रदोष काल में माँ लक्ष्मी की पूजा करना उत्तम माना गया है। दीपावली के दिन संध्या को 5:39 से रात्रि 8:14 तक प्रदोष काल रहेगा। प्रदोष काल में भी स्थिर लग्न समय सबसे उतम रहता है। इस दिन प्रदोष काल व स्थिर लग्न दोनों तथा अमृत चौघडिया भी साथ रहने से मुहुर्त बहुत ही शुभ है। दीपावली में घर पर पूजा के लिए 6.47 से 7.41 तक का समय सर्वश्रेष्ठ है । अर्धरात्रि में महानिशा और माँ काली की पूजा सिंह लग्न में मध्यरात्रि 1.14 से 3.28 तक करना श्रेष्ठ है ।

दीपावली के अगले दिन 24 अक्टूबर को गोवर्धन पूजा सुबह 11.26 से दोपहर 12.50 तक करना उत्तम रहेगा। इसी तरह 25 अक्टूबर को भईया दूज में भाइयों को तिलक करने का शुभ मुहूर्त सुबह 7.30 से 10.16 तक और फिर दिन में 12.16 मिनट से 1.19 तक है चूँकि सुबह 10.30 से 12 बजे तक राहु काल है अत: इस समय बहनो को अपने भाईयों को तिलक करने से बचना चाहिए ।